एक नकारातमक दृदटिकोण

आज हम नकारात्क दृडष्टकोण से हटने का उपवास कर रहे हैं।

दृदटिकोण सब कु छ है। यह एक ऐसी मानदसकता है जो अनय सभी तरयों को अपनी अिीन कर लेती है। और मैं चाहता हूँ दक हम अपने जीवन से नकारातमकता को िूर करें। आप अपने दृदटिकोण से यह दनयदनत्त कर सकतरे हैं दक जीवन आसान है या कदिन। अदिकांर लोग हर बात को नकारातमक तरीके से िेखते हैं, नकारातमक बातों के घदटत होने की अपेषिा करते हैं, और सवयं को नकारातमक पररणामों में ले जाते हैं। वे कभी आगे नहीं बढते हैं। इसदलए    

आइए आज हम इसे बिल

1. पर्रेश्वर “हाँ” का पर्रेश्वर है। 2 कु ररदनरयों 1:20 कहता है- “क्योंदक परमेश्वर की दजतनी प्रदतज्ाएँ हैं, वे सब उसी में ‘हाँ’ के सार हैं।” वह एक सकारातमक परमेश्वर है। और आप उसके सवरूप में रचे हुए हैं।

2. क्या ्यह हो सकता हैं! सिलता “कर सकतरे हैं” के द्ारा आती है, न दक “नहीं कर सकते हैं” के द्ारा! दिदलदपपयों 4:13 कहता हैं, “जो मुझे सामरय्त िेता हैं उसमें मैं सब कु छ कर सकता हूँ।”

3. आप ्ें जो नकारात्क ्ानडसकता है उससरे छु टकारा पा्यें। आप में उपदसरत “नकारातमक मानदसकता” के कारण आपको प्रतीत होता है दक आप यह जानते हैं, दक लोग आपके बारे में क्या सोच रहे हैं और यह आम तौर पर बुरा होता है। “वह सोचती है दक मैं एक बेवकू ि हूँ” “मैं बता सकता हूँ दक वह सिैव मुझ पर िोष लगाता है”    आदि। आपके बारे में एकमात् दजस वयदति के दवचार महतवपूण्त हैं, वे परमेश्वर के हैं जो अचछरे हैं।

4. अपनरे आसपास करे डवशाल लोगों को दरेखना बनद करें। और भीतर की डवशालता को दरेखना आरमभ करें! जो आप में है वह महान हैं। अपने को सब कु छ जीतता हुआ िेखना आरमभ करें!

5. तापसथापी (thermostat) बनें, ताप-्ापक ्यनत्र (thermometer) नहीं।एक तापसरापी तापमान को डनधा्तररत करता है। वह उसे पढता नहीं है। अपनरे दृडष्टकोण करे तापसथापी को “करे वल ऊपर का” सोिनरे करे डलए डनधा्तररत करें। वयवसरादववरण 28:13 कहता है, “तू नीचे नहीं, परनतु ऊपर ही रहरेगा।” दकसी अनय तरीके से सोचने या जीने से इनकार करें।

6. अपनी सबसरे बड़ी खोज आज करें! जीवन में सबसे बड़ी खोज यह है दक आप अपने मन के दृदटिकोण को बिलकर अपना जीवन बिल सकते हैं। यीरु ने कहा, “द्वश्ास करनेवाले के द्लए सब कु छ हो सकता है।”

इसे सोचें और इसे कहें

मेरा जीवन कदिन नहीं आसान हो रहा है! मैं अपने जीवन में परमेश्वर के द्ारा की गई अचछी बातों पर धयान के दनरित करता हूँ। मेरा दवश्वास है दक सभी बातें समभव हैं! मैं अवसर, पिोननदत और सिलता को अपनी ओर आने की अपेषिा करता हूँ क्योंदक मैं एक दवश्वासी हूँ। मैं करेवल ऊपर का हूँ और नीचे का नहीं। मैं दसर हूँ और पूँछ नहीं। मेरा दवश्वास और अपेषिाओं का दृदटिकोण अनय सभी तरयों पर प्रारदमकता ले आता है    ये यीरु के नाम में आज से ही आरमभ होती हैं!



Categories: christianity, hindi

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