मैं अपनी भावनाओं को दनयदनत्त नहीं कर 

आज हम उन दवचारों का उपवास कर रहे हैं जो कहते हैं: “्ैं अपनी भावनाओं को डन्यडनत्रत नहीं कर सकता।”

हम सभी में भावनाएँ हैं, परनतु िुभा्तगय से कभी-कभी वरे हम पर प्रभावी हो जाती हैं!

परमेश्वर ने हमें सकारातमक और सवसर भावनाओं के सार जीने के दलए बनाया है। वह नकारातमक भावनाएँ हैं जो हमारे जीवन, हमारे समबनिों और हमारे भदवषय को नुकसान पहुँचा सकती हैं। इस दवचार को दमटा िेने की आवशयकता है दक हम अपने दलंग, अपनी संसकृ दत, अपनी जादतयता या अपने वयदतितव के कारण अपनी भावनाओं से “पीदड़त” हैं।

आइए आज हम इसे बिलें

1. ह्ारी भावनाएँ ह्ाररे डविारों का पररणा् हैं। यदि आप िु:खिायी दवचारों के बारे में सोचते हैं, तो आप िु:खी हो जाएँगे। यदि आप आननि और दवश्वास से भरे दवचारों के बारे में सोचते हैं, तो आप आनदनित हो जाएँगे। क्योंदक जो जैसा सोचता है, वह वैसा ही हो जाता है।

2. इस डवश्वास को असवीकार करें डक आपकी भावनाएँ आपकी संसकृ डत, जाडत्यता ्या डलंग का पररणा् हैं। आपकी संसकृ दत भावनाओं के बारे में अदिक या कम वयति करने वाली हो सकती है, परनतु हम सभी आदतमक प्राणी हैं जो परमेश्वर के वचन के सार अपनी भावनाओं के ऊपर रासन करने की सामरय्त रखते हैं।

3. आपको सं्य् डद्या ग्या है। यह आप में है! 2 तीमुदरयुस 1:7 कहता है, “क्योंदक परमेश्वर ने हमें भय की नहीं पर सामरय्त, और प्रेम, और सं्य् की आतमा िी है।” गलादतयों 5:23 कहता है, “आतमा के िल में सं्य् सदममदलत है; और आतमा आप में वास करता है!”

4. डवश्वास करें डक आप डन्यनत्रण ्ें हैं। जैसे आप अपने दवचारों को दनयदनत्त करेंगे, वैसे ही आप अपनी भावनाओं को भी दनयदनत्त करेंगे। तब, आप िूसरों को दनयदनत्त करने की इचछा को महसूस नहीं करेंगे!

5. आप स्रण कर सकतरे हैं डक आननद क्या है। दयम्तयाह यह भूल गया रा दक आननि क्या होता है क्योंदक उसने सवयं को िुग्तदत में पड़ा हुआ बताया रा। जब उसने परमेश्वर की भलाई के बारे में सोचना आरमभ दकया, तब उसके जीवन में आननद लौट आ्या। भावनाएँ दवचारों का अनुसरण करती हैं – चाहे वे अचछे हो या बुरे।

6. अपनी भावनाओं को ऊपर की ओर व्यक्त करें, और आपको सदैव उनहें बाहरी रूप सरे व्यक्त करनरे की आवश्यकता नहीं होगी। जब आप अपने मन और भावनाओं को परमेश्वर के सामने रखते हैं (चाहे वे दकतने भी बुरी क्यों न हों), तब िूसरों पर भड़कने की समभावना कम हो जाती हैं।

इसे सोचें और इसे कहें

मैं अब अपनी भावनाओं के दनयनत्ण में नहीं हूँ। वे मेरे दनयनत्ण में हैं। जब मैं अपने मन को अचछे दवचारों से भरता जाऊँ गा, वे दवचार अचछी भावनाओं का रूप लेंगे। मैं अपनी भावनाओं को अपने वैचाररक जीवन के द्ारा दनयदनत्त कर सकता हूँ, और मेरा वैचाररक जीवन परमेश्वर के वचन के प्रदत समदप्तत है। मेरा अपने जीवन पर आतम-दनयनत्ण और प्रभुतव है। और इस दिन से, मेरी भावनाएँ मुझे दनयदनत्त करने के अपेषिा, मेरी सेवा करेंगी। मैं यीरु के नाम से अपनी भावनाओं को परमेश्वर के सामने रखता हूँ, और मुझे उनहें िूसरों के आगे उणिेल िेने की आवशयकता नहीं है!



Categories: christianity, hindi

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