“मैंने षिमा करने का प्रयास दकया, परनतु षिमा 

करने की भावना नहीं आई।”

आज हम उस दवचार से हटने का उपवास कर रहे हैं जो कहता है, “्मैंने क्ष्मा किने का प्र्ास रक्ा, पिन्तु क्ष्मा किने की भावना नहीं आ िही है।”

कई लोग जीवन में इस दलए पीछे रह जाते हैं क्योंदक वे षिमा करने से पहले षिमा की भावना की प्रतीषिा करते हैं। इस बीच, जब वे अपनी भावनाओं के बिलने की प्रतीषिा करते हैं, तब षिमा न करने की भावना उनको हादन पहुंचाती रहती है। जब तक आपके दवचार नहीं बिलते, आपकी भावनाओं में पररवत्तन नहीं आएगा! 

आइए आज हम इसे बिलें

1. षि्ा एक भावना नहीं है। इसे एक मुफत उपहार के रूप में दरेनरे का दनण्तय दलया गया है। आपके मन में दकसी के प्रदत जो भी दरकायत, कड़वाहट, या आक्ोर है, वह तब तक नहीं जाएगी जब तक आप “इसे” उपहार के रूप में िेने का चुनाव नहीं करते।

2. डवश्वास सरे षि्ा करें। 2 कु ररदनरयों 5:7 कहता है, “क्योंदक हम रूप को िेखकर नहीं, पर दवश्वास से चलते हैं।” कभी भी अपने दवश्वास को अपनी भावनाओं के पीछे न करें। आपकी भावनाएँ आपके दवश्वास का सार िेंगी।

3. जब वरे वापस आनरे की प्र्यास करती हैं तो आरिोश ्या रिोध की भावनाओ सरे धोखा न खाए। आप यह सोचने की परीषिा में पड़ जाएँगे, “मुझे कु छ महसूस नहीं हो रहा, इसदलए कु छ भी नहीं बिला है। मुझे प्रतीत होता है दक मुझे वासतव में उनहें षिमा नहीं करना चादहए रा।” यह एक झूि है! यह वह सोच है दजससे हटने के दलए उपवास करना चादहए। दजस षिण आप दकसी को षिमा करना चुनते हैं, यह हो चुका होता है, दिर यह बात कोई अर्त नहीं रखती दक आप क्या महसूस करते हैं।

4. डवश्वास करें और आभारी रहें डक आप षि्ा न करनरे की पीड़ा और पररणा्ों सरे ्ुक्त हैं। परमेश्वर का िनयवाि करें दक आप सवतंत् और मुति हो गए हैं। जब आप इस काय्त को हर स््य करेंगे, तो आप पीड़ा को कम और कम महसूस करेंगे, जब तक दक यह पूरी तरह से चली नहीं जाती।

5. षि्ा करना: इस शबद का अथ्त स्झें। इसका सीिा अर्त है दक पहलरे सरे ही िे िेना। हमें उस वयदति के षिमा माँगने से पहले; उसके बिलने से पहलरे ही षिमा कर िेना चादहए; और सबसे महतवपूण्त इससे पहलरे दक आप कु छ महसूस करें।दजस तरह दवश्वास का काय्त परमेश्वर की प्रदतज्ाओं को िेखने से पहलरे ही उसकी प्रदतज्ाओं पर भरोसा करने के द्ारा आरमभ हो जाता है (मरकु स 11:24-25), वैसे ही षिमा आपके महसूस करने से पहलरे काय्त करती है। जब आप दकसी वयदति के प्रदत अचछी भावनाओं को महसूस करने से पहलरे ही षिमा कर िेते हैं, तब आप दवश्वास के सबसे ऊँ चे सतर पर जीते हैं।

6. लोगों नरे आपकरे प्रर् क्या डक्या है, इसकी अपरेषिा उस पर ध्यान दें, जो पर्रेश्वर नरे आप करे द्लए डक्या है। भजन 103:2-4 कहता है, “हे मेरे मन, यहोवा को िनय कह, और उसके दकसी उपकार को न भूलना। वही तो तेरे सब अिम्त को षिमा करता, और तेरे सब रोगों को चंगा करता है, वही तो तेरे प्राण को नार होने से बचा लेता है, और तेरे दसर पर करूणा और िया का मुकु ट बानिता है” इन बातों पर दवचार करें।

इसे सोचें और इसे कहें

मैं यह सवीकार करता हूँ दक षिमा एक भावना नहीं है। यह एक दनण्तय है। मैंने जो दनण्तय दलया है, उसके कारण मैं आज उन कड़वी भावनाओं, समसयाओं, और अनुत्तररत प्रार्तनाओं के बिलने की अपेषिा करता हूँ।

मैं दवश्वास के द्ारा षिमा करता हूँ, दजसका अर्त है दक मैं परमेश्वर के वचन के अनुसार काय्त करता हूँ और अपनी षिमा को घोदषत करता हूँ, तब मैं षिमा में चल रहा होता हूँ, चाहे मुझे कु छ महसूस हो या न हो।



Categories: christianity, hindi

Tags: , , , , , , , , , , , , ,

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: