“मैं उिास महसूस कर रहा हूँ।”

आज हम उस दवचार से हटने का उपवास कर रहे हैं जो कहता है, “्ैं उदास ्हसूस कर रहा हूँ।”

हम सभी ने इसे कभी न कभी महसूस दकया है। उिासी अब संसार में दवकलांगता का प्रमुख कारण है। अक्सर, उिासी हमारी कदमयों और गलदतयों के दलए अपने पर हमारा सवयं का क्ोि होता है।

किादचत् आपने ऐसा सोचा होगा: “जीवन एक बािा है; इसका क्या लाभ; मैं कभी भी आनदनित नहीं रहूँगा।” इन दवचारों की रचना आपसे अपने जीवन में एक अलौदकक सामरय्त उतपनन करनेवाले आननि और आतमदवश्वास को छीनने के दलए हुई है।

आइए आज हम इसे बिलें

1. अपनरे को दोर्ी िहराना बनद करें। िोषी िहराना एक ऐसी मानदसकता है जो आप से आपके आननि और रादनत को छीन लेती है। रोदमयों 14:22 कहता है, “िनय है वह जो सवयं को िोषी नहीं िहरता  ।” सवयं को िोषी न िहराएं क्योंदक परमेश्वर आपको िोषी नहीं िहराता है।

2. पर्रेश्वर अभी भी आपकरे ऊपर का् कर रहा है! दिदलदपपयों 1:6 हमें सवयं को बोझ से हलका करने के दलए कहता है। उसने आप में एक अचछा काय्त आरमभ दकया है; वह इसे पूरा करेगा! परमेश्वर पर भरोसा रखें दक आप प्रगदत कर रहे हैं।आप िहरे हुए नहीं हैं।

3. डवश्वास करनरे की सा्र्य्त ्ें जाएँ। 1 पतरस 1:8 कहता है: “   उससे तुम दबना िेखे प्रेम रखते हो, और अब तो उस पर दबन िेखे डवश्वास करकरे ऐसे आनदनित और मगन होते हो जो वण्तन से बाहर और मदहमा से भरा हुआ है।” चाहे आप कु छ भी महसूस करें, परमेश्वर के प्रदतज्ाओं पर दवश्वास करें, और उिासी चली जाएगी।

4. श््त को असवीकार करें। यीरु ने क्ू स पर आपके अपमान को अपने ऊपर ले दलया है। यह बात कोई मायने नहीं रखती दक आप क्या महसूस करते हैं या आपने क्या दकया है। हम सब दकसी ना दकसी बात से जूझ रहे हैं। यदि आप अंिकार महसूस करते हैं, तो समरण रखें: परमेश्वर आपके सार हैं, यहाँ तक दक तराइयों में भी वह आपके सार है।

5. सव्यं को सकारात्क लोगों सरे घरेरें। सकारातमक सोच और बोलना संक्ामक है, िीक वैसे ही जैसे नकारातमक सोच होती है। सवयं को के वल उन लोगों के सार घेरें जो अपने वयवहार और रबिों के सार जीत का वातावरण बना िेते हैं।

6. याद रखें, आप असहा्य नहीं हैं। असहाय होने के दवचार उिासी लाते हैं। पदवत् आतमा हमारा सहायक है। उसने आपको अके ला नहीं छोड़ा है और वह आपको कभी अके ला नहीं छोड़ेगा।

7. उदासी सा्र्य्तहीनता की भावना सरे आती है। आपके पास प्रार्तना करने और उत्तर प्राप्त करने की सामरय्त है –सामरय्त की यह भावना आननि लाती है।

से सोचें और इसे कहें

मैं अपने जीवन में अब आगे एक दिन के दलए भी उिास नहीं रहूँगा। मैं सवयं की दननिा करना और अपनी कदमयों के दलए सवयं को कोसना बनि कर िेता हूँ। मेरा दवश्वास है दक परमेश्वर प्रतयेक दिन मुझमें काय्त कर रहा हैं।

मैं एक नकारातमक दवचार करने वाला वयदति नहीं हूँ। मैं सकारातमक हूँ। परमेश्वर मेरे दलए, मेरे सार और मुझमें हैं, इसदलए मुझ में उिासी नहीं रह सकती। मैं असहाय नहीं हूँ क्योंदक मेरे अनिर पदवत् आतमा है। मैं उिासी के प्रतयेक अंर को मुझ में से दनकलने की आज्ा िेता हूँ। मैं यीरु के नाम से, इसे हटने और समुरि में जा पड़ने की आज्ा िेता हूँ!



Categories: christianity, hindi

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