“मैं अपमादनत महसूस कर रहा हूँ।”

आज हम उस दवचार से हटने के दलए उपवास कर रहे हैं जो कहता है, “्ैं अप्ाडनत ्हसूस कर रहा हूँ।”

हम सभी जानते हैं दक हमारे सार, अनयाय या बुरा वयवहार करने से और झूि या बुरी बातें बोलने से, हमें कै सा प्रतीत होता है। ऐसा होने पर अपमादनत महसूस करना बहुत ही सहज सी बात हैं और हम यह सोचते हैं दक हमें ऐसा महसूस करने का अदिकार है। परनतु यह एक दवनारकारी जाल है।

आइए आज हम इसे बिलें

1. अप्ाडनत ्हसूस करना आपको जाल ्ें फं साता है। सकैं डलोन (िोकर) एक अचछी तरह से दबछाये-हुए-जाल का िं िा है। जब कोई जानवर जाल के िनिे को छू ता है, तो वह तुरंत उसे पकड़ लेता है और वह जानवर िं स जाता है। जब आप अपमादनत महसूस करते हैं, तो आप एक जाल में िं स जाते हैं। इस दवषय पर दवचार करना और जानकारी प्राप्त करना आपको जाल से बाहर रहने के दलए सरति करेगा।

2. अप्ाडनत ्हसूस करना आत्-धाड््तकता सरे आता है। हम सोचते हैं, “वे मेरे सार ऐसा कै से कर सकते हैं? मैंने उनके सार ऐसा कभी नहीं दकया होता!” परनतु हम सभी ने पाप दकया है। इस ज्ान के सार दक आप भी असिल रहे हैं, दवनम्रता को अपनायें। और दिर अपमादनत महसूस करने की भावना आप पर स अपनी पकड़ को खो िेगी।

3. आप ध्ान देने का प्र्यास नहीं कर सकतरे हैं! 1 कु ररदनरयों 13:5 (अंग्ेजी का एमपलीिाईि अनुवाि) कहता है, “प्रेम (परमेश्वर का प्रेम) झगड़ालू या सतानेवाला या द्ेषी नहीं है।” क्यों? “क्योंदक यह गलती को सहने पर कोई ध्यान नहीं दरेता है।” जब हम अपने सार दकए गए गलत वयवहार पर धयान िेते हैं तब हम अपमादनत महसूस करते हैं। इस पर धयान िेना बनि करें। यह बहुत महंगा है।

4. डन्यनत्रण वापस लें। जब हम िूसरों ने हमारे सार क्या दकया है, इस बात पर धयान िेते हैं तो हम िूसरों को हमें दनयदनत्त करने का अवसर िेते हैं। परमेश्वर ने आपके डलए जो दकया है वह उससे कही अदिक महान है जो िूसरों ने आप के सार दकया है। परमेश्वर ने जो आपके दलए दकया है उस पर धयान िें।

5. सवग्त की ओर दरेख कर बोलें, संसार की ओर नहीं। अपने गुससे और िुःख को ऊँ ची आवाज से परमेश्वर के सामने वयति करें। उसे बताएँ दक आपको दकतनी अदिक िेस पहुँची है। वह आपको िेस पहुँचाने वाले को षिमा करें (परमेश्वर के सामने उँची आवाज में), चाहे आप कु छ भी महसूस करें या न करें; और उस आपको चंगा करने के दलए कहें।

6. आपको कु छ भी अप्ाडनत नहीं कर सकता! यह कै से समभव है? भजन 119:165 कहता है, “तेरी वयवसरा से प्रीदत रखनेवालों को बड़ी रादनत होती है; और उनको कु छ िोकर नहीं लगती।” “प्रीदत” के दलए युनानी रबि का एक अर्त “लगाव” है। परमेश्वर जो कहता है उससे सवयं को जोड़ें, और आप उस रदति से िूर हो जाओगे जो आपको यह दिखाती है दक लोगों ने आपके सार क्या दकया है या आपको क्या कहा है। परमेश्वर के वचन से प्रेम करने का यही अर्त है।

इसे सोचें और इसे कहें

मैं अपमादनत महसूस होने से मुति हूँ। मैं अपमान, कड़वाहट और क्ोदित महसूस होने के अदिकार की भावनाओं से मुति हूँ। मैं उन भावनाओं के जाल में नहीं िसूँगा। मैं परमेश्वर के वचन से प्रेम करता हूँ। उसने जो भी कहा और दकया है, उन सब से मैं सवयं को जोड़ता हूँ। मैं मेरे सार हुए दकसी भी अनयाय या गलत वयवहार पर धयान िेने से इनकार करता हूँ। मैं उन लोगों को षिमा और मुति करता हूँ, दजनहोंने मुझे िेस पहुँचाई है। मैं यीरु के नाम में परमेश्वर से अपनी भावनाओं को वयति करता हूँ, और चंगाई को प्राप्त करता हूँ!



Categories: christianity, hindi

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