“मैं एक पीदड़त की तरह महसूस कर रहा हूँ।”

आज हम उस दवचार से हटने का उपवास कर रहे हैं जो कहता है, “्ैं एक पीडड़त की तरह ्हसूस कर रहा हूँ।”

दवक्टर फ्ें कल ने, जो ऑरदवट्ज़ में नाज़ी मौत दरदवर से बच दनकला रा, सवतंत्ता को इस रूप में पररभादषत दकया, “जो दकसी भी पररदसरदत में अपने दृदटिकोण का चुनाव करने की षिमता रखता है।”

संसार का सबसे बुरा कारागार – हमारा मन है दजसमें हम अपने आपको कै ि कर लेते हैं। 

आइए आज हम इसे बिलें

1. आपकरे अडतररक्त, कोई भी आपको आपकी वत्त्ान की डसथडत ्ें नहीं रख सकता है। हमें आज ही दवजेता बनने के दलए अपने िादयतव को सवीकार करना आरमभ करना होगा, पीदड़त होने के दलए नहीं। आप जयवंत से बढ़कर हैं -एक दवजयी वयदति के कहीं अदिक बढकर।

2. हो सकता है डक लोगों का इस बात सरे लरेना-दरेना हो डक आप उस पररडसथडत ्ें कै सरे पड़रे, परनतु करे वल आप ही ्यह डनधा्तररत कर सकतरे हैं डक आप उस डसथडत ्ें बनरे रहना िाहतरे हैं ्या नहीं।

3. पीऱि् ्ानडसकता तब स्ाप्त हो जाती है जब ह् जीवन ्ें अपनरे दृडष्टकोण और डदशा करे पूररे दाड्यतव को लरे लरेतरे हैं। वयवसरादववरण 30:5,19 कहता है, “सुन, आज मैं ने तुझ को जीवन और मरण, हादन और लाभ दिखाया है इसदलये तू जीवन ही को अपना ले, दक तू और तेरा वंर िोनों जीडवत (दवजयी, भरपूर, परमेश्वर की इचछानुसार जीवन) रहें।”

4. पडवत्र आत्ा सरे सव्यं की सहा्यता करनरे करे डलए कहें। समपूण्त दाड्यतव का अथ्त ्यह नहीं है डक ह् इस्ें अकरे लरे हैं। परमेश्वर हमारी ओर है, और वह हमारी सहायता करेगा। सहायता की अपेषिा करना सवाभादवक है – परनतु इसे परमेश्वर से प्राप्त करें। यूहनना 16:13 कहता है, “पदवत् आतमा हमारा सहायक है” जब आपको उसकी सहायता दमलती है, तो आपको दकसी भी बात के दलए दकसी को िोषी िहराने की आवशयकता नहीं है! हम के वल तब ही िोषी िहरते हैं जब हम असहाय महसूस करते हैं—परनतु हम असहाय नहीं हैं!

5. इसरे स्झरे डक दाड्यतव शबद करे ्ूल अथ्त ्ें प्रत्युत्तर दरेना है। हम उन सभी बातों को दनयदनत्त नहीं कर सकते हैं जो िूसरे हमारे सार करते हैं, परनतु हम अपने प्रत्युत्तर को दनयदनत्त कर सकते हैं। हमारे प्रतयुत्तर में हमारी सवतंत्ता और हमारी उननदत दनदहत है।

6. अपनी सा्र्य्त को खोनरे न दें। जब हम िूसरों को यह अनुमदत िेते हैं दक इस बात को दनिा्तररत करें दक हम कै सा प्रत्युत्तर िेते हैं—तब हम दवजय, सवासरय और सिलता में जीने की अपनी सामरय्त को खो बैिते हैं। हमारे पास षिमा करने की, बचने की और दकसी भी बात के ऊपर दवजय पाने की सामरय्त है। जब हम िूसरों को िोष िेते हैं, तो हम उनहें उसी सामरय्त को िे िेते हैं।

7. पर्रेश्वर नरे जो कु छ आपको जो डद्या है उसरे अपनरे डन्यनत्रण ्ें लें। सवामी ने उस िास से, दजसने अपना तोड़ा दछपा दलया रा, कहा “तो तुझे चादहए रा दक मेरा रुपया सरा्तिों को िे िेता, तब मैं आकर अपना िन बयाज समेत ले लेता।” (मत्ती 25:24-27) उसने सवामी को िोषी िहराया और सवयं को बचाया। पररणामसवरूप, वह द्ेष और भय की परीषिा में दगर गया। उसने सब कु छ खो दिया क्योंदक उसके पास एक पीदड़त मानदसकता री।

इसे सोचें और इसे कहें

कोई मुझे नीचे िबा कर नहीं रख सकता! मैं पीदड़त नहीं हूँ। मैं एक दवजेता हूँ। मैं जीवन में अपने प्रतयुत्तरों– अपने दृदटिकोण और अपने दनण्तयों का पूरा िादयतव लेता हूँ। पदवत् आतमा, मैं तेरी सहायता मांगता हूँ। तू मुझ में वास करता है, और तू मेरा सहायक है! मैं िूसरों को िोष िेकर अपनी सामरय्त को खो िेने से इनकार करता हूँ। मैं अपने दवचारों, अपने कायषों और अपने प्रत्युत्तरों का िादयतव लेता हूँ। मैं इस दवचार का तयाग करता हूँ दक मेरी पररदसरदत दकसी और की गलती के कारण है। मैं एक दवजेता हूँ। यीरु के नाम से मैं जयवंत से भी बढकर हूँ!



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