“मैं नहीं बिल सकता।”

दजस तरह एक दततली को परमेश्वर के द्ारा उड़ान भरने के दलए रचा गया है, आपको भी उसी तरह से रचा गया हैं! यद्यदप, दततली अपने सुनिर रंग और भवय पंखों में के वल तभी उभर सकती है, जब उसे उसके दनमा्तता के द्ारा गमा्तहट भरे सुरषिा कवच में पररवदत्तत दकया जाता है!

गलत सोच से हटने वाला यह उपवास मनन आपका सुरषिा कवच है। जब आप अगले 40 दिनों में अपने मन को परमेश्वर के दवचारों से लपेटेंगे, आप भी आश्चय्तजनक रूप से पररवदत्तत हो जाएँगे! 

क्या आप उड़ने के दलए तैयार है? चदलए चलते हैं!

आज हम उस दवचार से हटने का उपवास कर रहे हैं जो कहता है,“्ैं नहीं बदल सकता।”

हम सभी ने कभी न कभी यह महसूस दकया है दक हम अपने जीवनों में एक दनदश्चत आित या कमजोरी को नहीं बिल सकते। हम अक्सर उस बात में सवयं को “सीदमत” महसूस करते हैं जो पहले कभी हमारे द्ारा “पररभादषत” की गई री। परनतु, जब हम इस बारे में अपनी मानदसकता को बिलते हैं, दक हम कौन हैं और परमेश्वर ने हमें क्या दिया है, तो कु छ भी बिल सकता है। आज आप में एक नई आरा का जनम होगा!

आइए आज हम इसे बिल

1. परमेश्वर के अनुग्रह के लि ए जागृत हो जाइए। उसका अनुग्रह हमें बदलने, आदत को छोड़ने या अपने अतीत से मुक्त होने के लि ए सामर्थ्य देता है। अनुग्रह की नदी सदैव बहती रहती है। बस इसमें कदम रखें और इसे प्राप्त करें!

2. यह ्ानें डक बदलनरे की सा्र्य्त एक उपहार है। 2 तीमुदरयुस 2:25 कहता है दक परमेश्वर “पश्चाताप” या “पररवत्तन का मन” एक उपहार के रूप में िेता है।

3. सभी तरह करे पररवत्तन का आरमभ इस डवश्वास करे साथ होता है, डक पर्रेश्वर आपसरे प्ररे् करता हैं। रोदमयों 2:4 कहता है, “क्या तू नहीं जानता दक यह परमेश्वर की प्रेममय करुणा है जो तेरे सोचने और काय्त करने के तरीके को बिलने का प्रयास कर रही है?” (अंग्ेजी का जी िबलूय टी अनुवाि)

4. इस वचन, पर धयान िें दक, उसका प्ररे् और उसकी करुणा ह्ारी सोि करे तरीकरे को बदलती है; ततपश्ात् वरे ह्ाररे का्य्त करनरे करे तरीकरे को बदलतरे हैं। सरायी पररवत्तन का आरमभ अपने जीवन के दवचार को परमेश्वर के वचन में समदप्तत करने से होता है।

5. उस प्रडरि्या पर डवश्वास करें जो प्रगडत की ओर लरे जाती है। यदि यह तुरनत नहीं होता तो दचनता न करें। यीरु ने मरकु स 8 में एक बार एक अनिे वयदति को सपर्त दकया रा, और दिर उसे िूसरी बार दिर से सपर्त दकया रा, तब वह पूरी तरह से चंगा हुआ। मेरा मानना है दक अगले 40 दिन आपके दलए यीरु के द्ारा आपका दूसरा सपर्त होगा।

6. सव्यं को करे वल उसी तरह पुनःपररभाडर्त करें डजस तरह पर्रेश्वर आपको करता है। अपनी आितों, गुणों और सीमाओं की दपछली पररभाषा से असमबदनित हो जाएं। आप सवयं को उसके सवरूप में बिलने जा रहे हैं।

इसरे सोिें और इसरे कहें

परमेश्वर ने मुझे परिवर्ति त होने का उपहार दिया है। मेरे सोचने के तरीके को बदल देने से, मेरी आदतें, भावनाएँ और मेरा जीवन सब कुछ बदल जाएगा। मैं अपने मन को नया करने की प्रक्रि या के प्रति अपने को समर्पि त करता हूँ, और मैं ईश्वरीय प्रगति की अपेक्षा करता ह।ै म ैं अपने बारे म ें पि छली परिभाषाओ ंऔर सीमाओ ंको स्वी कार करने से इन्का र करता हूँ। जब मैं परमेश्वर के वचन के द्वारा, अपने वि षय में उसके दृष्टिकोण को अपनाता हूँ, तो यीशु के नाम में, मैं उसके सदृश्य होता जाता हूँ।



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