कृपया मेरी ओर ध्यान दें!!

पहले सुनना है फिर ध्यान देना है। सुनना किसी भी आवाज़ या जानकारी को समझने की क्षमता है। सुनना उन पर ध्यान देना है। आज, यरमियाह के वचनों का पठन बहुत ही दुखद जान पड़ता है, लेकिन अफ़सोस कि वह असामान्य नहीं। यह पुराने नियम के कथन हमारे लिए वो विशाल लाल झंडे हैं, जो हमें उन आगे के खतरों से आगाह करते हैं, जब हम परमेश्वर की ओर से अपने सारे मन,समझ और शक्ति से ध्यान हटा लेते हैं। ऐसा क्यों? जब हम परमेश्वर और उनके मार्गों पर ध्यान नहीं देते, तो निश्चय ही हम गलत दिशा की ओर बढ़ रहे हैं; अर्थात पीछे की ओर, न कि आगे। कई बार, यह गलत रास्ते हमें अंधकार और बर्बादी की ओर ले जाते है।

व्याकुलता का अपराधी आमतौर पर कुछ निर्दोष रूप से प्रस्तुत आकर्षण होते हैं, जैसे व्यस्तता, बच्चों का पालन पोषण, कुछ और चीज़ों की खोज, या यहां तक कि एक इलेक्ट्रॉनिक गैजेट जिसमें कई मजेदार आश्चर्य होते हैं! मेरी समझ में, मेरे छः बच्चे जो कि अच्छे से सुन सकते है, कभी कभी सुनने में अनसुनी कर सकते हैं! और कभी उनका ध्यान केंद्रित करने के लिए मेरा गुप्त शब्द होगा: आइस क्रीम। एकदम से वह सुनकर बोलते हैं, वाह! सच में माँ? फिर मुझे सच बताना पड़ता है कि, ‘नहीं मुझे बस आपका ध्यान अपनी ओर लाना था!’ असलियत में मैं भी कई बार सुनने में निष्क्रिय हो जाती हूं, वो भी तब जब अपने परिवार से ज़्यादा मेरा पूरा ध्यान स्मार्टफोन की ओर केंद्रित हो। एक बार फिर से बताना वो, प्रिय?

आमतौर पर, हम इन गलत विचारों पर हंस सकते हैं, लेकिन यह वास्तव में ठीक नहीं है। यह लोगों के लिए अपमानजनक हो सकता है। और जब परमेश्वर को अनदेखा करने की बात आती है, तो दुर्भाग्यपूर्ण यह परमेश्वर को अमूल्य और हमें कमज़ोर विद्रोही बना देती है। यदि हम सम्पूर्ण रूप से अपने स्वगीर्य पिता के पीछे चलना चाहते है, तो हमें उनके सन्देशों पर पूरा ध्यान देने की आवश्यकता है।

याद रखिये,उसकी ईश्वरीय बातचीत भिन्न भिन्न रूप से प्रकट होती है: जैसे उसके वचन से, संगी विश्वासी से, बाइबल योजना से, स्वपन या दर्शन, एक धीमी आवज़, या चिंतित विचार। हाँ, परमेश्वर के बातचीत करने के माध्यम विशाल है, क्योंकि वह एक महान परमेश्वर है और बात करने में विशेषज्ञ, जो हमेशा हमसे जुड़े रहने की इच्छा रखता है!


पिता से मांगे: वह क्या चीज़ है जो मुझे अपना ध्यान केंद्रित करने से भटका रही है?



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